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लेनिन

वर्ष 2017 रूसी क्रांति का शताब्दी वर्ष था, जिसने ज़ारवाद को उखाड़ फेंका। 2018 मार्क्स के जन्म की बाइसेन्टेन्री थी  और 2020 लेनिन का 150वां जन्मदिवस । वैश्विक परिदृश्य के मद्देनज़े यह समय वामपंथ को पढ़ने, समझने और सोचने के लिए सबसे उपयुक्त समय है ।

लेनिन

व्लादिमीर इलिच उल्यानोव (22 अप्रैल 1870- 21 जनवरी 1924) एक रूसी क्रांतिकारी, राजनीतिज्ञ और राजनीतिक सिद्धांतकार थे जो अपने उपनाम लेनिन से बेहतर जाने जाते हैं। उन्होंने 1917 से 1924 तक सोवियत रूस की सरकार और 1922 से 1924 तक सोवियत संघ के प्रमुख के रूप में कार्य किया। उनके प्रशासन के तहत सोवियत संघ, कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा शासित एक-दलीय कम्युनिस्ट राज्य बन गया। वैचारिक रूप से एक कम्युनिस्ट, लेनिन ने मार्क्सवाद का एक प्रकार विकसित किया जिसे लेनिनवाद के रूप में जाना जाता है।

सिमबर्स्क में एक समृद्ध मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे लेनिन ने 1887 में, अपने भाई की फांसी के बाद, क्रांतिकारी समाजवादी राजनीति को अपनाया। रूसी साम्राज्य की ज़ारिस्ट सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के कारण उन्हे कज़ान इंपीरियल विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया जिसके बाद आगे के  वर्षों को उन्होंने कानून की डिग्री के लिए समर्पित किया। वह 1893 में सेंट पीटर्सबर्ग चले गए और एक वरिष्ठ मार्क्सवादी कार्यकर्ता बन गए। 1897 में, उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया और तीन साल के लिए निर्वासित कर दिया गया, जहाँ उन्होंने नादेज़्दा क्रुपस्काया से शादी की।

अपने निर्वासन के बाद, वह पश्चिमी यूरोप चले गए, जहाँ वे मार्क्सवादी रूसी सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी (RSDLP) में एक प्रमुख रणनीतिकार के रूप में स्थापित हुए। 1903 में, उन्होंने RSDLP के वैचारिक विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जूलियस मार्टोव के मेंशेविकों के खिलाफ बोल्शेविक गुट का नेतृत्व किया।

उन्होंने 1905 में रूस की असफल क्रांति के दौरान विद्रोह को प्रोत्साहित किया और बाद में प्रथम विश्व युद्ध दौरान एक यूरोप-व्यापी सर्वहारा क्रांति अभियान चलाया। मार्क्सवादी के रूप में उनका मानना ​​था कि यह अभियान पूंजीवाद को उखाड़ फेंकने और समाजवाद के प्रतिस्थापन का कारण होगा।

वह अक्टूबर क्रांति में एक प्रमुख भूमिका निभाने के लिए रूस लौट आए, जिसमें बोल्शेविकों ने नए शासन को उखाड़ फेंका। 1917 की  फरवरी क्रांति के बाद ज़ार को हटा दिया और एक अंतरिम सरकार की स्थापना की। लेनिन की बोल्शेविक सरकार ने शुरू में वामपंथी समाजवादी क्रांतिकारियों, निर्वाचित सोवियतों, और एक बहु-पक्षीय संविधान सभा के साथ सामंजस्य स्थापित किया और 1918 तक यह सत्ता नई कम्युनिस्ट पार्टी को हस्तांतरित कर दी गई। लेनिन के प्रशासन ने बड़े पैमाने पर किसानों, राष्ट्रीयकृत बैंकों और उद्योगों के बीच भूमि का पुनर्वितरण किया। एक संधि पर हस्ताक्षर कर के सोवियत रूस प्रथम विश्व युद्ध से बाहर हो गया और कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के माध्यम से विश्व क्रांति को बढ़ावा देने की ओर अग्रसर हुआ । विरोधियों को लाल आतंक द्वारा दबा दिया गया।

लाल आतंक दरअसल राज्य सुरक्षा सेवाओं द्वारा प्रशासित एक हिंसक अभियान था जिसके अंतर्गत एकाग्रता शिविरों में हजारों लोग मरे या मारे गए। उनके प्रशासन ने 1917 से 1922 तक रूसी गृह युद्ध में दक्षिणपंथी और बोल्शेविक विरोधी सेनाओं को हराया और 1919-1921 के पोलिश-सोवियत युद्ध का निरीक्षण किया।

1921 में लेनिन ने युद्ध में तबाही, अकाल और विद्रोहों का जवाब देते हुए बाजार उन्मुख नई आर्थिक नीति के माध्यम से आर्थिक विकास को प्रोत्साहित किया।

कई गैर-रूसी राष्ट्रों ने 1917 के बाद रूसी साम्राज्य से स्वतंत्रता हासिल कर ली थी, लेकिन 1922 में इन में से तीन राज्य फिर से नए सोवियत संघ में जुड़ गए। उनके स्वास्थ्य में समस्या बढ़ती गई और अंततः गोर्की में उनकी मृत्यु हो गई जिसके पश्चात जोसेफ स्टालिन पूर्व-प्रतिष्ठित व्यक्ति के रूप में सोवियत सरकार में उनके उत्तराधिकारी बनें ।

लेनिन की जीवनी (राहुल सांकृत्यायन) को पढ़ने के लिए यहाँ जाएं 

Author is a voracious reader and an autodidact. He is studying Statistics and Philosophy and works as an Analytics Consultant. He has published columns on Public Policy, Governance, Politics, Economics and Philosophy among others. When in leisure he listen's to 70's rock and engage in pro-people talk. He can be contacted on surya@columnist.com

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