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हम अमेज़ॅन जैसी समस्या का समाधान कैसे करें?

अप्रैल 2013 की एक ठंडी सुबह, मध्य जर्मनी के छोटे शहर बड हर्सफेल्ड के बाहर एक हजार से अधिक श्रमिकों ने एक वैश्विक महत्व की कार्रवाई की। सीटी और दूर से नजर आने वाली वेस्ट के साथ, जनरल यूनियन वर.डी के सदस्यों ने एक अमेज़ॅन पूर्ति केंद्र (बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण और वितरण) के बाहर एक श्रंखला बनाकर विरोध किया जो अमेज़ॅन के इतिहास में पहली हड़ताल थी ।

आज, पूंजीवाद के उत्तरार्ध की छुट्टियों में सबसे अजीब और विचारहीन – “ब्लैक फ्राइडे” – सबका ध्यान अमेज़ॅन और उसकी श्रम प्रथाओं पर आकर्षित करता है। उस समय जब अलाबामा में अमेरिकी कार्यकर्ता संघ बनाने का साहसिक प्रयास कर रहे हैं, प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल ने #MakeAmazonPay का वैश्विक अभियान शुरू किया है। फिर भी, दो दशकों से दुनिया भर में कई यूनियनों और अभियानों ने मंथन किया है कि दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक बन चुकी इस कंपनी के निरंतर विस्तार पर कैसे अंकुश लगाया जाए।

हालाँकि बड हर्सफेल्ड और (अंततः) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेज़ॅन, हड़तालों के प्रति काफ़ी आदी हो गया है, फिर भी कंपनी की शक्ति कम होने का कोई संकेत नहीं दिखा रही है। यहाँ तक की जर्मनी में, हड़ताल के 300 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, अमेज़ॅन लगातार श्रमिकों की सामूहिक समझौते की मांग को दबाए रखने में सक्षम रहा है। यूके में, ग्राफिकल, पेपर एंड मीडिया यूनियन (जिसका “यूनाइट” में विलय हो गया) द्वारा 2001 में श्रमिकों को संगठित करने का शुरुआती प्रयास, अमेज़ॅन द्वारा प्रभावी रूप से निपटा दिया गया था। जीएमबी जनरल यूनियन के हाल के प्रयास जो “अमेज़ॅन वर्कर्स आर नॉट रोबॉट्स” (ऐमज़ान के मज़दूर रोबोट नहीं हैं) के आस-पास केंद्रित रहे हैं, इसने अधिक प्रतिरोध साबित किया है, हालाँकि संघ मानता है कि उसे अभी लंबा रास्ता तय करना है।

मीक रिक्स, जीएमबी के एक राष्ट्रीय अधिकारी कहते हैं, “हमने भुगतान में थोड़े समय के लिए कुछ वृद्धिशील बदलाव जीते। हमने, जिनके साथ भी अन्याय किया गया हो, उनकी नौकरियों को भी बचाया है। तो हाँ, हम कुछ मामूली बदलाव हीं ला पाए हैं, अभी काफ़ी कुछ करना है, खासकर दुर्घटनाओं और चोटों को कम करने के लिए।” रिक्स कोविड-19 पर अमेज़ॅन के शिथिल दृष्टिकोण को चुनौती देने में संघ की कमजोरी पर ज़ोर देते हैं, फिर भी मान्यता प्राप्त करना एक लक्ष्य है – जो वेतन और शर्तों पर बातचीत करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है – उसके लिए अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है।

वास्तव में, ऐसा लगता है कि हर जगह, अमेज़ॅन काफी हद तक अप्रभावित है। इस बहु-अरब डॉलर की कंपनी के बारे में व्यापक पैमाने पर सोचें: इसकी वर्ल्ड-बीटिंग सेवा, जिसे कोविड-19 टेस्ट किट की डिलिवरी में सहायता के लिए बुलाया गया था; इसके वर्कर-बीटिंग पेटेंट; इसका आर्टफिशल इन्टेलिजन्स के छेत्र में कार्य, जिसके पास 10 करोड़ से अधिक एलेक्सा उपकरण हैं, जो चुपचाप लोगों के घरों में उनको सुन रहे हैं; क्लाउड कंप्यूटिंग पर इसका अद्वितीय बाजार प्रभुत्व – क्या यह आश्चर्य की बात है कि लोकप्रिय कल्पना में, इस कंपनी के नाम ने मूल रूप से तीस लाख वर्ग किलोमीटर के वर्षावन को भी पीछे छोड़ दिया है?

आप इसे जैसे भी देखे, अमेज़ॅन वाम की पूरी परियोजना के लिए एक चुनौती है – उन लोगों से लेकर, जो केवल श्रमिकों के वेतन में अपनी आवाज़ चाहते हैं, से उन लोगों तक, जो अमेज़ॅन की विशाल बुनियादी ढांचे को जनता की भलाई के लिए पुन: नियोजित करना चाहते हैं, और निस्संदेह ही वे लोग भी जो कंपनी को पूरी तरह से बंद कर देना चाहते हैं। अमेज़ॅन का पैमाना, आधुनिक इंटरनेट और खुदरा उद्योगों के बुनियादी ढांचे में इसका इतना महत्व है कि इसके प्रभाव में युग-परिभाषित किया जा सकता है, जो इसे, हमारे लिए सामूहिक रूप से निपटाने हेतु एक महत्वपूर्ण राजनीतिक समस्या बनाती है।

नियंत्रण की संस्कृति

ऐसी ज़्यादा यूनियनें नहीं हैं जो अमेज़ॅन को लेकर चिंतित नहीं हैं। लेकिन जहां अमेज़ॅन का रवैया – उसके श्रमिकों के प्रति, उनकी आजीविका के प्रति और उनकी सुरक्षा के प्रति – बेहद खराब है, वहीं चिंता का एक कम-चर्चित कारण यह भी है कि अमेज़ॅन अभेद्य लगता है। यूनियनें जो भी इसके ख़िलाफ़ आयोजित करती हैं, उन्हें इन आयोजनों के बाहरी स्वभाव से ही संतोष करना पड़ता है, जबकि अमेज़ॅन अपनी स्वयं की आयोजन रणनीतियों को अधिक गति और पैमाने पर विकसित करता जा रहा है, और साथ ही अल्गोरिथ्म से चलने वाली प्रबंधन तकनीकों और लचीली कार्य प्रथाएँ (निश्चित रूप से अपने डेलीवेरी ड्राइवरों के लिए), दोनों को विकसित करने में अग्रणी है, जो श्रमिकों को कमज़ोर और प्रयोज्य छोड़ देती हैं।

ऐसा नहीं है कि अमेज़ॅन यूनियनों के बारे में चिंतित नहीं है। विशेष रूप से अमेरिका में, इसके द्वारा खुले तौर पर, संघ-विरोधी प्रचार का उपयोग व्यापक रूप से प्रलेखित है, और हाल ही में अमेज़ॅन को ख़ुफ़िया संचालकों की भर्तियों के मामले में अपना बचाव करने के लिए मजबूर किया गया था। ये भर्तियाँ उसने “श्रम आयोजन खतरों” पर नज़र रखने के लिए की थी – अमेज़ॅन के मुताबिक़ यह इस पद की भूमिका का ग़लत विवरण है। लेकिन अमेज़ॅन की यूनियनों से ये घृणा, किसी भी संघ की अभी तक की माँगों की वजह से नहीं है, बल्कि कंपनी द्वारा अपने कार्यस्थलों, कार्य प्रक्रियाओं और कार्यबल पर पूर्ण-नियंत्रण की अपनी ज़िद से है।

अमेज़ॅन में किसी भी स्टाफ क्षेत्र में प्रवेश करें और आप इसके आचार के बारे में जानेंगे – यहाँ मुक़ाबलों का स्वागत होता है, जब तक की वे अमेज़ॅन के तरीक़ों से किए जाएँ। इसमें कंपनी कार्य परिषदों और कर्मचारियों के प्रतिनिधियों का उपयोग करना, चिंताओं को उठाना, या प्रबंधन के दैनिक “गेम्बा वॉक” के दौरान सामान के प्रवाह को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है, इस बारे में फ़ीड्बैक प्रदान करना शामिल है। “गेम्बा वॉक” प्रोडक्शन लाइन की एक दौड़ है, जिसका उद्देश्य है अक्षमताओं को पहले दूर करना और बाद में उन्हें “काइज़न” के माध्यम से पूरी तरह निपटा देना। “काइज़ेन” जापानी प्रबंधन सिद्धांत से लिया गया एक विचार है जिसका अर्थ है, “निरंतर सुधार” जिसे अमेज़ॅन किसी भी “वेस्ट से बचाने वाली” गतिविधि के संदर्भ में इस्तेमाल करता है। कर्मचारी जो “काइज़ेंस” को इकठता करते हैं, उन्हें मैनेजरों द्वारा अनुकूल रूप से देखा जा सकता है या कंपनी की वेबसाइट तक पर चित्रित किया जा सकता है।

अमेज़ॅन की आवेदन प्रक्रिया भी इसी तरह कुल नियंत्रण की संस्कृति को झलकाती है। एक एजेंसी भर्ती केंद्र में अमेज़ॅन की नौकरी के लिए दाखिला लें और इंडक्शन वीडियो, वन-टू-वन इंटरव्यू और ऑन-द-स्पॉट ड्रग टेस्ट के दौरान, आपको एक समयबद्ध प्रश्नावली से भरी हुई एक टैबलेट सौंपी जाएगी – एक तौर का नैतिकता परीक्षण – जिसे आपको सवालों के जवाबों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने हेतु अपनी मूल भाषा में देना होगा। प्रश्नावली के कुछ प्रश्नों में से हैं: पत्रकारों से अपने काम के बारे में बात करने की नैतिकता, यदि आप जानते हैं कि एक सहयोगी चोरी कर रहा है, तो आप क्या कार्यवाही करेंगे। एजेंसी तर्क देगी की यह प्रश्नावली प्रक्रिया का एक ऐसा तत्व है जिस पर एजेंसी का कोई नियंत्रण नहीं है और जिसके परिणाम सीधे मूल्यांकन के लिए अमेज़ॅन को भेजे जाते हैं। एजेंसी इस बात पर भी जोर देगी कि अमेज़ॅन आपके ईमानदार जवाब की तलाश कर रहा है, और केवल “मॉडल-उत्तरों” का चुना जाना केवल संदिग्ध ही लगेगा (“हम सभी मानव हैं, आखिरकार”)।

क्या व्यवस्था के बाहर रह कर ही संतोष करना पड़ेगा?

इस तरह की सर्वाधिकारी प्रकृति का सामना करते हुए, यह साफ़ है कि बहुत से लोग अमेज़ॅन की ज्यादतियों पर लगाम लगाने के लिए विधायकों/सांसदों की ओर देखते हैं। लेकिन अभी तक सांसदों ने अमेज़ॅन में बहुत कम रुचि दिखाई है। हालाँकि आमतौर पर, काम के भविष्य के संदर्भ में संक्षिप्त रूप से स्वीकार किया जाता है, कि कम्पनियाँ जो बहुत ही परिष्कृत डिजिटल तकनीकों की डेटा-प्रोसेसिंग क्षमताओं पर बहुत अधिक भरोसा करती हैं, उनकी कामकाजी प्रथाओं की यात्रा की दिशा कुछ गड़बड़ है, फिर भी सांसद हमेशा काम की परिस्थितियों के बजाय रोजगार-सुरक्षा पर ज़्यादा फ़ोकस करते हैं।

इसी तरह, यूनियनों के बीच आम, इस “अनिश्चितता के शिकार” का तर्क यह मानता है कि ई-कॉमर्स और गिग अर्थव्यवस्था में लचीले, अस्थायी, असामान्य या सटीक फर्जी रोजगार प्रथाओं को ठीक करने से श्रमिकों को लाभांश मिलना सुनिश्चित होगा। जैसे कि एक स्थायी अनुबंध उन श्रमिकों को सशक्त बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा जो एक शिफ़्ट में 11 मील की दूरी तक चलने के लिए मजबूर हैं या जो एक सप्ताह में 200 पार्सल प्रति घंटा की रफ्तार से 55 घंटे तक पैकिंग करते हैं। वहीं स्थानीय परिषदों, जिनमें मजदूरों द्वारा चलाए जाने वाले परिषद भी शामिल हैं, का एक महत्वहीन मुद्दा है जो अक्सर पीछे की ओर झुकते हुए, नौकरी-निर्माण के नाम पर, जन वित्त पोषित सड़कों के साथ अमेज़ॅन को समायोजित करते हैं, और योजनाओं के लिए अनुमति देते हैं। और साथ ही, वे अमेज़ॅन द्वारा बनाई गई नौकरियों के प्रकारों के बारे में अस्पष्ट चिंताओं का हवाला भी देते हैं।

अगर विधायकों को देखकर विश्वास नहीं आता, तो यह उचित है कि लोग दिशा के लिए संगठित श्रमिक आंदोलन की ओर देखते हैं। यह कोई रहस्य नहीं है कि ब्रिटेन सहित दुनिया के अधिकांश हिस्सों में, दो दशकों से अमेज़ॅन के संदर्भ में यूनियनों की उपेक्षा की गई है, और इसके फलस्वरूप, यूनियनों को बाहर के सदस्यों को भर्ती करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जैसे कि स्थानीय समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर। हम यूनियनों की बाधाओं का सामना करने के लिए यूके के आक्रामक संघ-विरोधी कानूनों को दोषी ठहरा सकते हैं, लेकिन साथ ही साथ अन्य मुद्दे भी हैं। किसी भी संघ की रणनीति में कार्यबल के साथ “उनके दरवाजे में पैर रखना” और व्यक्तिगत कर्मचारियों के लिए केस-वर्क लेना और दीर्घकाल में उन्हें मालिक से मान्यता दिलवाना (चाहे वैधानिक या स्वैच्छिक) शामिल होता हैं। फिर भी, अमेज़ॅन के द्वारा की गयी अस्थायी कार्यबल की नियुक्तियाँ (आमतौर पर तृतीय-पक्ष एजेंसियों के माध्यम से), इसका उच्च-टर्नओवर और इसके मुख्य कर्मचारी, संघ घनत्व की तरफ़ जाने वाले किसी भी रास्ते में बाधाएँ प्रस्तुत करते हैं।

फिर यह थोड़े ही आश्चर्य की बात है कि मीडिया अभियान यूनियनों के लिए, भर्ती के उद्देश्य से और अमेज़ॅन को शर्मसार करने, दोनो के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीति बन गए हैं – विशेष रूप से जब पत्रकारों द्वारा किए गए खुलासों ने जनता को अमेज़ॅन की दीवारों के पीछे के जीवन के बारे में जागरूक बनाने में कुछ हद तक सफलता हासिल की है। फिर भी अमेज़ॅन के खिलाफ खाली हवा में तीर चलाने पर इतनी भारी निर्भरता वास्तव में अमेज़ॅन श्रमिकों को व्यवस्थित करने के लिए किसी भी अभियान की क्षमता की कमजोरी को उजागर करती है और जहां इस तरह की रणनीति विशिष्ट मुद्दों पर आंशिक जीत दे सकती है, तब भी यह स्पष्ट नहीं है कि ये वास्तव में उन श्रमिकों को सशक्त करने के लिए किस हद तक उपयोग की जा सकती है – वो श्रमिक जिनका काम दुनिया की सबसे शक्तिशाली कंपनी के प्रभावी संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।

इसके बजाय, हम जो देख रहे हैं, वह है अमेज़ॅन को जवाबदेह रखने हेतु हमारे पास राजनीतिक उपकरणों की उपलब्धता और अमेज़ॅन की शक्ति वास्तव में जिस तरह कार्यस्थल में व्यवस्थित है उसके बीच की एक बड़ी असमानता। “निरंतर सुधार” के लिए अमेज़ॅन का दृष्टिकोण संघर्ष के संभावित स्रोतों को बाहर करना है, चाहे वे इसकी आपूर्ति श्रृंखला में कहीं भी पाए जाएँ। इसका अर्थ है, जैसे-जैसे यह विकसित और बड़ा होता रहेगा, इसके खिलाफ संगठित होना कठिन होता जाएगा। उदाहरण के लिए, पिछले कुछ वर्षों में हुआ अमेज़ॅन फ्लेक्स का व्यापक विस्तार – अमेज़ॅन फ्लेक्स प्राइम डिलीवरी के लिए कंपनी का गिग-शैली वाला प्लेटफ़ॉर्म है, जिसने रॉयल मेल जैसी बाहरी (और बेहतर संघीकृत) फर्मों पर कंपनी की निर्भरता को काफी कम कर दिया है। इस संदर्भ में, यह कल्पना करना एक महत्वाकांक्षी सोच होगी कि भविष्य में अमेज़ॅन का विकास संगठनात्मक रूपों की ओर बढ़े जो शायद यूनियनों के ऐतिहासिक आयोजन प्रदर्शनों की शैली से मेल खाए।

एल्गोरिथमिक शक्ति

यह अब तक स्पष्ट हो जाना चाहिए कि हालाँकि बिन-श्रमिकों वाले कारखानो के फर्श के आकर्षक वीडियो, जो कि ज़िप्पी रोबोटों से भरे हुए होते हैं, समय-समय पर सोशल मीडिया पर देखे जाते हैं परंतु पूर्ति केंद्रों में अमेज़ॅन की तकनीकी रणनीति, महंगी रोबोटों से भरी असेम्ब्ली लाइनों की तुलना में सस्ते-भुगतान वाले श्रमिकों की एल्गोरिथ्म के द्वारा प्रबंधित अधीनता की ज़्यादा लगती है, और कुछ समय तक ऐसा ही चलता रहेगा। चूँकि इसके पूर्ति केंद्र आम तौर पर शहर से बाहर और शहरी केंद्रों की तुलना में प्रमुख सड़कों के पास स्थित होते हैं, यह कोई संयोग नहीं है कि अमेज़ॅन अपने रसद संचालन का आधार, बेरोज़गारी से भरे पूर्व-उच्चऔद्योगिक क्षेत्रों में बनाना पसंद करता है।

लेकिन श्रमिकों के ऊपर अमेज़ॅन का अधिकार केवल सामाजिक और आर्थिक नहीं है। कंपनी की उत्पादक प्रक्रियाओं की तकनीकी शक्ति थके हुए श्रमिकों को “रोबोट की तरह महसूस करा रही है।” वास्तव में, कंपनी के एल्गोरिथ्म प्रबंधन के अग्रणी उपयोग और किसी भी आयोजन की सम्भावना मात्र पर इसके प्रभाव के बारे में बात किए बिना अमेज़ॅन के द्वारा श्रमिकों के उपचार के बारे में बातचीत करना असंभव होगा।

एक पिकर का काम लें – एक ऐसा व्यक्ति जिसका काम यादृच्छिक रूप से संग्रहीत शेल्फ स्टैकों से वस्तुएँ एकत्र करनी होती हैं – एक हाथ में रेडियो डेटा टर्मिनल लिए, जिससे प्राप्त से निर्देशों के आधार पर हर श्रमिक को एक समय पर एक वस्तु उसके अंतिम ज्ञात स्थान के आधार पर आवंटित की जाती है ताकि वस्तुओं के बीच के मार्ग को अनुकूलित रखा जा सके। स्कैनर एक टाइमर प्रदर्शित करता है जो यह दर्शाता है कि कार्यकर्ता को प्रत्येक वस्तु को खोजने और स्कैन करने के लिए कितना समय लेना चाहिए – आमतौर पर लगभग 12 सेकंड – जिसके बाद डिवाइस पर एक नयी वस्तु का निर्देश भेजा जाता है। लोकप्रिय ग़लतफ़हमी के अनुसार, यह सुनिश्च्ति करने के लिए की कार्य सुचारु रूप से चले, जिन टावरों में श्रमिक आम तौर पर काम करते हैं, उन्हें श्रमिकों से भरा नहीं होना चाहिए – लेकिन इसके विपरीत, एल्गोरिथमिक प्रणाली के लिए सर्वोत्तम दृश्य यह है कि श्रमिक कभी भी एक दूसरे के पथ को पार नहीं करें या एक दूसरे के रास्ते में ना आएँ। इसका परिणाम यह होता है कि अमेज़ॅन के लिए काम करने में अविश्वसनीय रूप से अकेलापन हो सकता है। प्रत्येक कार्यकर्ता एक लंबी पारी के दौरान लगातार 12-सेकंड की पाली में चलने वाले कार्य में फंस जाता है, और सभी कार्य लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयास करता है – ऐसे लक्ष्य जो कई श्रमिकों के अनुसार या तो अस्वीकार्य हैं या अप्राप्य हैं।

मशीनी जुए पर अपने प्रभावशाली अध्ययन में, नताशा डॉव शूएल ने उल्लेख किया है कि कैसे स्क्रीन-आधारित सूचना प्रौद्योगिकियों की डिज़ाइन विशेषताएँ आदतन जुआरी जैसे “ज़ोन” या “प्रवाह” प्रभाव पैदा करती हैं। इसी प्रकार, अमेज़ॅन कार्यकर्ता अस्थायी और मनोसामाजिक अव्यवस्था का अनुभव करते हैं, लेकिन शक्ति का एक और असंतुलन है जो एल्गोरिथ्म प्रबंधन प्रणाली की सूचनात्मक विषमता द्वारा उत्पन्न होता है। एल्गोरिथ्म प्रबंधन टेलर के प्रबंधन सिद्धांतों पे आधारित है, जो काम के गर्भाधान (विचारों, योजना) और श्रमिकों द्वारा इसके निष्पादन के बीच एक बुनियादी विभाजन द्वारा परिभाषित किए गए हैं। इसकी जड़ें 20 वीं शताब्दी के अंत में परिभाषित किए गए संगठनात्मक सिद्धांतों में हैं जिन्हें एक औद्योगिक इंजीनियर फ्रेडरिक विंसलो टेलर द्वारा परिभाषित किया गया था – जिन्होंने श्रमिकों के पारंपरिक ज्ञान-विवेकाधीन कार्यों में परिवर्तन की वकालत की, जिन्हें फिर छोटे-छोटे आसान कार्यों में बाटा जा सकता था और समय के अनुसार गणना की जा सकती थी। संगठन का नियंत्रण और काम की योजना को मैनेजरों के हाथों में देने की वजह से कुशल श्रमिकों की काम करने की प्राकृतिक शक्ति टूट जाती है। यदि यह रहस्यमय और तकनीकी लग रहा है, तो डिलीवरी करने वालों की कुंठाओं पर विचार करें, जो खुद को “एल्गोरिथ्म का नौकर” महसूस करते हैं, और जिनको लगातार एक जटिल एल्गोरिथ्म प्रबंधन प्रणाली को द्वितीय अनुमान करने की स्थिति में डाला जाता हैं। ऐसी प्रणाली जो उन तरीकों से संचालित होते हैं जिन पर वे निर्भर हैं लेकिन फिर भी उसे नियंत्रित या प्रभावित नहीं कर सकते।

नियंत्रण की सीमा

“प्रोसेस” (या प्रोटोकॉल) से संबंधित शक्तियां जो अमेज़ॅन के श्रमिकों को दिन-प्रतिदिन अक्षम और ध्वस्त रखती हैं, उनसे निपटने का मतलब है कि अमेज़ॅन के कार्यस्थलों में वास्तव में कैसे काम किया जाता है, उस पर कुछ माँग जताना। इस क्षेत्र में अमेज़ॅन की राजनीतिक इच्छाशक्ति अच्छी तरह से प्रलेखित है, और यह एक वास्तविकता भी है जिसे हमें मानना ​​होगा अगर हम गंभीर हैं कि श्रमिकों के साथ अब रोबोटों जैसा व्यवहार नहीं होंना चाहिए। लेकिन ऐतिहासिक रूप से, यह यूनियनों के लिए एक मुश्किल स्तिथि है, जो लंबे समय तक संगठन और प्रौद्योगिकी के सवालों को मालिकों के लिए प्राथमिकता के रूप में मानती आयी हैं, जब तक कि उसमें सीधे उनकी नौकरियों का नुकसान शामिल ना हो। कार्यस्थलों के भीतर श्रमिकों (और इसलिए काम) को कैसे आयोजित किया जाना चाहिए, इस प्रश्न को कार्टर एल. गुड्रिक ने 1920 में नाम दिया था, “नियंत्रण की सीमा” – यह वह फ़ॉल्ट लाइन है जो कार्यस्थलों से गुजरते हुए, वह जिस पर यूनियन दावा कर सकती है, और प्रबंधकीय नियंत्रण के क्षेत्र, जिसके भीतर कार्यस्थल के मामलों को “अकेले नियोक्ता के व्यवसाय” की तरह माना जाता है, का विभाजन करती है।

जिस समय में गुड्रिच लिखते थे, तब मज़दूरों के द्वारा कामगारों के लोकतांत्रिक नियंत्रण की माँग वामपंथी शब्दावली में मौजूद थी, भले ही वह ट्रेड यूनियनों का पसंदीदा लक्ष्य न रहा हो, जो जितना भी संभव हो वहाँ नियोक्ताओं के साथ अधिक सहयोगात्मक संबंध का विकल्प चुनते थे। 20वीं शताब्दी के दौरान, अंग्रेजी बोलने वाले देशों में रेड यूनियनों ने काफी हद तक अपनी प्राथमिकताओं को एक सीमित सीमा में बसाया है जहां तक सामूहिक सौदेबाजी का संबंध है: रोजगार, रोजगार की शर्तें (वेतन और अधिकार), और पेंशन। 1970 के दशक में, हैरी ब्रेवरमैन द्वारा इस स्थिति को अच्छी तरह से स्पष्ट किया गया था:

“संघीकृत श्रमिक वर्ग ने, पूँजीवादी उत्पादन के पैमाने और जटिलता से भयभीत रहते हुए, और उत्पादकता में तेज़ी से होने वाले लाभ से अपने मूल क्रान्तिकारी प्रोत्साहन में कमजोर होने हेतु, पूँजीवादी हाथों से उत्पादन पर नियंत्रण रखने के लिए अपनी इच्छाशक्ति और महत्वाकांक्षा को खो दिया था और इसके चलते, उसने उत्पाद में श्रम की हिस्सेदारी के लिए बार-बार सौदेबाजी की तरफ़ अपनी दिशा मोड़ी।”

ब्रेवरमैन ने यह भी विस्तृत किया कि प्रबंधन के साथ एक अधिक सहयोगी संबंध के विचार ने छोटे-छोटे आसान कार्यों में बाँटने की तकनीके, श्रम प्रक्रिया के संगठन और एक दैनिक आधार पर श्रमिकों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों के प्रति एक मौलिक अनिश्चितता को जन्म दिया। आजकल, जहाँ भी यूनियनें अपनी आवाज उठाती हैं, वह लगभग पूरी तरह से स्वास्थ्य या सुरक्षा कानून के संबंध में होता है, न कि शक्ति या मानवीय गरिमा के आधार पर। इन सीमाओं को बढ़ाने का उद्देश्य न तो यूनियनों को कोसना है (जो कि कानूनी रूप से न्यूट्रल होने के अलावा, अक्सर कम संसाधनों के साथ काम करतीं हैं), और न ही इस इच्छाधारी सोच में संलग्न होना है कि यूनियनों जल्द ही वैकल्पिक रूप से समाज के कामगार वर्ग की शक्ति की अग्रदल बन सकती हैं। लेकिन हारून बेनानव ने अपनी नई पुस्तक “ऑटोमेशन एंड द फ्यूचर ऑफ वर्क” में निहित किया है कि यूनियनें स्थिर उत्पादकता के आर्थिक संदर्भ में कार्यस्थल प्रौद्योगिकियों के “लाभ को साझा करने” के विचार पर भरोसा नहीं कर सकतीं। उनका तर्क है कि काम की “एक अलग दुनिया” के प्रति कोई भी सार्थक आंदोलन वास्तव में श्रमिकों के द्वारा उत्पादन पर विजय प्राप्त करने की आवश्यकता के बाद ही आना चाहिए।

एक साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई

ऐसा कोई एक क्षेत्र नहीं है जिसे हम अमेज़ॅन से लड़ने के लिए चुन सके, और जो हमारे सामने, श्रमिकों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अमेज़ॅन द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य सभी तरीकों को उजागर कर दे। हालाँकि उन तरीकों को जिन्हें अमेज़ॅन अपनी शक्ति को लागू करने में इस्तेमाल करता है, उनके बारे में अपनी समझ को व्यापक करना हमारे हित में है, क्योंकि ऐसा करने से हमारी काउंटर-शक्ति कैसी दिख सकती हैं वह साफ़ हो जाएगा। यदि हम यह स्वीकार करते हैं कि केवल यह इच्छा करना व्यर्थ है कि अमेज़ॅन कुछ अन्य, अधिक पारंपरिक और आसानी से संगठित कार्यस्थलों की तरह होता तो फिर यह वाम पर निर्भर हैं कि वह यूनियनों से लेकर सामाजिक आंदोलनों और (हम आशा करते हैं) पार्टियों तक – अमेज़ॅन की पकड़ को ढीला करने के लिए रणनीतिक तरीकों को सेट करे। और हम स्वीकार करे हैं कि इस प्रक्रिया में हमें अपनी आयोजन सूची का विस्तार करना होगा। केवल वही करना पर्याप्त नहीं होगा जो हम पहले से ही बार-बार करते आ रहे हैं, क्यूँकि दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से संघर्षण की लड़ाई में कभी नहीं हार सकती।

हालाँकि, जल्द ही या बाद में, हमें इस बात पर विचार करना होगा कि अमेज़ॅन के भीतर काम कैसे आयोजित किया जाता है, जिससे की हम दो बातों – काम के तत्वों पर और इस तथ्य पर कि पूर्ति केंद्रों के अंदर श्रमिकों का मौजूदा संगठन ज़मीन पर शक्ति बनाने के लिए भारी बाधा है – अपना दावा कर सके। इसमें इस बात की बेहतर समझ शामिल होगी कि एल्गोरिथमिक प्रबंधन किस तरह से काम का आयोजन करते हैं, कैसे सामाजिक और शक्ति संबंधों को पुनर्व्यवस्थित करते हैं, और कैसे सूचनात्मक विषमता को नष्ट करते हैं जो आज सुनिश्चित करता है कि श्रमिकों बिना किसी ताक़त के और डिस्पोजेबल रहें। इसमें शांत श्रम आंदोलन की रणनीतियां जैसे कि काम को धीरे करना या उद्देश्यपूर्ण तरीके से श्रम प्रक्रिया को बाधित करना शामिल है। जाहिर है, इस तरह की प्रतिज्ञा एक साम्राज्य के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ने के समान होगी। लेकिन अमेज़ॅन उस प्रकार की समस्या नहीं है जिसे आसानी से ठीक किया जा सके।

Date Written: 03-12-2020
Translator: Surya Kant Singh
Title: हम अमेज़ॅन जैसी समस्या का समाधान कैसे करें?
First Published: Progressive International

Author is a voracious reader and an autodidact. He is studying Statistics and Philosophy and works as an Analytics Consultant. He has published columns on Public Policy, Governance, Politics, Economics and Philosophy among others. When in leisure he listen's to 70's rock and engage in pro-people talk. He can be contacted on surya@columnist.com

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