Democracy

अमेरिकी चुनाव ने एक बात साफ कर दी है: डोनाल्ड ट्रम्प का फासीवाद कोई भूल नहीं है

2012 में, बराक ओबामा के पुनर्मिलन की पूर्व संध्या पर, रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक फ्रैंक अवलोकन में कहा। “जनसांख्यिकी की दौड़, हम बुरी तरह से हार रहे हैं। हम लंबे समय तक व्यापार में बने रहने के लिए पर्याप्त – गुस्सैल गोरे लोग पैदा नहीं कर रहे हैं ”। यह विश्लेषण सच भी हो सकता है, और इसके पक्ष में कई सबूत भी हैं । लेकिन जैसा कि जॉन मेनार्ड कीन्स ने अपने प्रसिद्ध टिप्पणी में कहा था: “एक लंबी दौड़ में हम सभी मारे जाएंगे”।

लंबे समय तक, 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के परिणाम कॉल के बहुत करीब बने रहे। यह तथ्य एक बात को स्पष्ट करता है। डोनाल्ड ट्रम्प की 2016 की जीत कोई कोई तुक्का नहीं थी, और उनका फासीवाद कोई विचलन नहीं है। बल्कि, यह संयुक्त राज्य अमेरिका की सामाजिक-राजनीतिक संस्कृति में जो वास्तविक और व्यापक है, उसकी कुछ प्रामाणिक अभिव्यक्ति है।

ट्रम्प ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत माउंट रशमोर में एक भीषण स्वतंत्रता दिवस के भाषण के साथ की, जिसमे उन्होंने पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन की भर्त्सना की । ट्रम्प ने खुद को एक ऐसे श्वेत अमेरीकी चैंपियन के रूप में प्रेषित किया, जिसका इतिहास और पहचान एक हिंसक “भीड़” से खतरे में थी।श्वेत वर्चस्व को आत्मरक्षा का एक तरीका बताना आधुनिक दक्षिणपंथी विचारधारा के लिए केंद्रीय है। यह ट्रम्प की बयानबाजी में भी एक चर्चित विषय है

यह संदेश बाद के महीनों के दौरान भी लगातार दिया जाता रहा, क्योंकि बार-बार ट्रम्प ने ‘कानून-व्यवस्था’ और ‘उपनगरों की रक्षा’ के बहानों पर कड़ी मेहनत की। बेशक, ब्लैक लाइव्स मैटर विरोध काफी हद तक शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया था, जबकि जो छुट-पुट हिंसा हुई भी, वह पुलिस और ट्रम्प के समर्थकों द्वारा उनके समर्थन और अनुमोदन के साथ हुई

वास्तविक ‘आदेश’ जो ट्रम्प लागू करने का वादा कर रहे थे, वह था नस्लीय आदेश।

2020 में, 2016 के विपरीत, मतदाताओं के पास ट्रम्प को आँकने के लिए उनका रिकार्ड था । उन्होंने रस्ट बेल्ट का पुन: औद्योगिकीकरण नहीं किया । उन्होंने अमेरिका के विदेशी युद्धों को समाप्त नहीं किया । उनके कार्यकाल में बेरोजगारी विनाशकारी स्तरों तक पहुँच गई । उन्होंने सीमा पर परिवारों से बच्चों को अलग कर दिया, उन्हें बंदी बना लिया, और फिर निर्वासित माता-पिता के वर्तमान स्थिति/स्थान को खो दिया । वह दक्षिणपंथी आतंकवादियों पर अहंकारी है, जिन्होंने मिशिगन के डेमोक्रेटिक गवर्नर के अपहरण की साजिश रची थी। उन्होंने खुद को एक सोसियोपैथिक और पक्षपाती के रूप में चिह्नित करने के लिए बहुत कुछ किया है जबकि औसत अमेरिकी को आर्थिक रूप कुछ भी नहीं दिया और उन्होंने अपना वोट बढ़ा लिया ।

चार वर्षों के बाद, और विशेष रूप से पिछले कुछ महीनों के बाद, ट्रम्प के लाखों समर्थकों को वास्तव में पता है कि वे किसके लिए मतदान कर रहे हैं। या इसे अधिक उदार शब्दों में कहें, तो उन्हें पता है कि ट्रम्प को अपना वोट देकर वे किन ताकतों को शक्ति प्रदान कर रहे हैं । चाहे वे सकारात्मक रूप से हिंसक सफेद वर्चस्व का पक्ष लेते हैं, या फिर वे सोचते हैं कि हिंसक श्वेत वर्चस्व की कीमत व्हाइट हाउस में ट्रम्प को रखने के लिए भुगतान करने लायक है ।

पिछले सप्ताहांत में, फासीवाद और अधिनायकवाद पर दर्जनों इतिहासकारों और विशेषज्ञों ने एक खुले पत्र में चेतावनी दी थी कि ट्रम्प से अमेरिकी लोकतंत्र को खतरा है । उन्होंने इस बारे में बहस को स्वीकार किया कि क्या ‘फासीवादी’, ‘फासीवादी जनवादी’ या केवल ‘निरंकुश’ हीं वे शब्द हैं जिनसे ट्रम्प शासन को चिन्हित किया जा सकता है, लेकिन स्पष्ट रूप से ये विश्लेषणात्मक पैरामीटर हैं जिनके भीतर उन्हें समझा जाना चाहिए। और वे इस तरह की शब्दावली को कितना भी अस्वीकार क्यों न कर लें, यह उनके समर्थकों ने हीं चुना है।

मोटे तौर पर, वे मतदाता श्वेत, आर्थिक रूप से संपन्न, मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध और बिना कॉलेज की शिक्षा के हैं। वे अपने सामाजिक दृष्टिकोण में अधिकारवादी हैं और नस्लवाद विरोधीयों के प्रति शत्रुतावादी । एक हद तक, उन्होंने अपने हितों के अनुसार मतदान किया है, शायद मुख्य रूप से, उनके आर्थिक हितों के लिए भी, और उस व्यापक सामाजिक व्यवस्था के लिए भी जो उन्हें लंबे समय से लाभान्वित करता रहा है।

अमेरिकी श्रमिक वर्ग को ट्रम्प के अल्पसंख्यक मतदाताओं के रूप में देखना एक भूल होगी, ठीक वैसे हीं जैसी अंतर्निहित संरचनात्मक कारकों के बजाए सतही कारकों को ट्रम्प की सफलता का अनुमानित कारण मान लेना । इसी तरह, इस साल गैर-श्वेत मतदाताओं के बीच ट्रम्प ने जो थोड़ी बढ़त भी हासिल की है वह ट्रम्पवाद के सामाजिक आधार की मूलभूत तस्वीर को नहीं बदलता है। श्वेत वर्चस्व हमेशा नस्लीय विषयों के छोटे समूह के सहयोग और सामाजिक-राजनीतिक आज्ञाकारिता के स्तर पर निर्भर करता है। इसके चालक और इसका प्रोत्साहन स्पष्ट रूप से पर्याप्त हैं, और इससे हमें आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए।

और न ही यह तथ्य कि सफेद राष्ट्रवाद की राजनीति अमेरिका में फल-फूल सकती है। ट्रम्प की तुलना अतीत के यूरोपीय फासीवादियों से करने की कोई ज़रूरत नहीं है जब हमारे पास अमेरिका के हीं पर्याप्त उदाहरण हैं। यह सदियों से हो रहे नरसंहारों और गुलामी पर बना एक राष्ट्र है, जिसकी परपीड़ा में सुख की चाहत की तुलना इतिहास के सबसे खराब अधिनायकवादी शासन से की जा सकती थी। इसके बाद दक्षिणी राज्यों में रंगभेद की एक सदी गुज़री, जो ज्यादा पहले की बात नहीं है।

स्वाभाविक रूप से, इस सब की सामग्री और वैचारिक विरासत पिघली नहीं है। इसके विपरीत, सफेद वर्चस्ववादी बैकलैश अमेरिकी इतिहास में एक आवर्ती विषय है, कॉन्फेडेरसी से जिम क्रो, कू क्लक्स क्लान और रिपब्लिकन ‘दक्षिणी रणनीति’। इस कहानी में डेमोक्रेट शायद ही निर्दोष हैं। जो बिडेन का 1994 के कुख्यात अपराध बिल को पेश करने और बसिंग के विरोध में अग्रणी भूमिका, एक केंद्रित तुष्टिकरण की राजनीति की मिसालें हैं जिन्होंने आज तक सफेद वर्चस्व बनाए रखा है।

दरअसल, ट्रम्पिज्म जिस जलाशय से पीता है, उसमें का अधिकतर हिस्सा अमेरिकी राजनीतिक संस्कृति की मुख्य धारा का है। राष्ट्रवादी रूढ़िवादिता जो अमेरिकी महानता की घोषणा करती है, उसे निहित या स्पष्ट शब्दों में, कम नश्वरता के ऊपर दर्ज करना, एक द्विदलीय प्रवचन है जो हमेशा एक स्पष्ट फासीवादी द्वारा विनियोग के लिए परिपक्व था। कम से कम इसके नस्लीय उपक्रम नहीं दिए गए। अमेरिकी श्वेत वर्चस्व शाही शक्ति पर उतना ही लागू होता है जितना कि घरेलू व्यवस्था पर। ट्रम्प ने इसे बहुतायत से स्पष्ट कर दिया है।

फासीवाद ने हमेशा सामाजिक पदानुक्रम की चरम रक्षक के रूप में काम किया है। 2012 में ग्राहम द्वारा पहचाने जाने वाले दीर्घकालिक रुझानों से न केवल रिपब्लिकन पार्टी के भविष्य को खतरा है, बल्कि खुद सफेद वर्चस्व को भी। उस संदर्भ में, ट्रम्पवाद एक अल्पकालिक राजनीतिक सुधार है, जो वास्तविक भय से पैदा हुआ है और जिसमे रणनीतिक गणना के रूप में गंभीर विचारों की कमी है।

ट्रम्प हार गए होंगे, और वहाँ से ग्रैंड ओल्ड पार्टी के लिए एक तीव्र गिरावट आ सकती है। लेकिन चुनाव की रात के बाद, उन प्रक्रियाओं के बारे में कोई भी शालीनता, विशेष रूप से उनके निकटवर्ती प्रभाव, अक्षम्य होंगे। यहां हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वह नवउदारवादी पूंजीवाद का कोई दुष्प्रभाव नहीं है। यह अपने आप में एक दुर्जेय सामाजिक-राजनीतिक ताकत है, जिसे हराने में एक पीढ़ी लग सकती है।

डेविड वेयरिंग यूके की विदेश नीति में शैक्षणिक विशेषज्ञ और नोवारा मीडिया के लिए स्तंभकार हैं।

Date Written: 10-11-2020
Author: David Wearing
Translator: Surya Kant Singh
Title: अमेरिकी चुनाव ने एक बात साफ कर दी है: डोनाल्ड ट्रम्प का फासीवाद कोई भूल नहीं है
First Published: Progressive International

Author is a voracious reader and an autodidact. He is studying Statistics and Philosophy and works as an Analytics Consultant. He has published columns on Public Policy, Governance, Politics, Economics and Philosophy among others. When in leisure he listen's to 70's rock and engage in pro-people talk. He can be contacted on surya@columnist.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *